लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। पिछले वर्ष अप्रैल 2024 में गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र के दुतकैया गांव के शिवमंदिर में एक समुदाय द्वारा तोड़ फोड़ किया गया था, ग्रामीणों की शिकायत पर इसके मुख्य आरोपी आरिफ नाबालिग था तब उसे बाल संप्रेषण गृह में रखा गया था। तीन दिन पहले जमानत मे छूट कर आते ही गाँव के लोगों को परेशान करना शुरू दिया जो लोग शिव मंदिर मामले में प्रत्यक्षदर्शी थे या फिर शिकायतकर्ता थे। रविवार को मुख्य आरोपी आरिफ (लाल शर्ट) अपने दो सहयोगी इमरान और सलीम के साथ मिल कर ग्राम से बाहर दिखने वाले ग्रामीणों को पिटाई शुरू कर दिया। पत्थर, चाकू और अन्य धारदार हथियार से रविवार सुबह 4 बजे से मारना पीटना शुरू किया। हमले का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। वही 5,6 ग्रामीण तब तक लहूलुहान हो गए गए। पीड़ित शिकायत लेकर राजिम थाना पहुंच गया।
वही पीड़ितों पर राजिम कुम्भ मेले और वीआईपी मूमेंट का हवाला देकर पीड़ितों के शिकायत की अनदेखी कर दी गई। मामले में राजिम पुलिस की अनदेखी के चलते ही दोपहर बाद आक्रोश फूटना शूर हुआ और फिर ग्रामीण कानून को अपने हाथ में ले लिया। आरोपियों के घर को तोड़ फोड़ करना शुरू किया। और 11,12 घरों को आग के हावाले भी किया गया, धीरे धीरे आक्रोश हिंसक घटना में तब्दील हो गया। आक्रोश बढ़ता देख राजिम पुलिस ने तीन तीन अलग एफआईआर दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आगजनी के फंसे आरोपी के परिवार को देर रात घरों से निकाल कर सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया है। हिंसक झड़प में पुलिस के कुछ जवान और ग्रामीण भी घायल हुए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आरोपी के अन्य सहयोगी लगातार गांव के माहौल को खराब करते रहे हैं।गांव में नशा खोरी, मारपीट, गाली गलौच के अलावा जमीन पर अतिक्रमण जैसे घटना को लगातार अंजाम दे रहे थे जिसको लेकर आक्रोध धीरे धीरे पनप रहा था। अभी भी ग्रामीणों को डर है कि मामले में छूटने के बाद आरोपी फिर से गांव वालो से बदला लेंगे। इसलिए ज्यादातर ग्रामीण खुल कर कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं।