राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी कमार जनजाति का युवक गंभीर बीमारी के चलते दर्दभरी जिंदगी जीने को मजबूर

रिपोर्टर : लोकेश्वर सिन्हा

गरियाबंद। गरियाबंद जिले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी कमार जनजाति का एक युवक गंभीर बीमारी के चलते विगत पिछले 03 सालों से दर्दभरी जिंदगी जीने को मजबूर है।

मामला गरियबन्द जिले के ग्राम पंचायत कौंदकेरा के आश्रित ग्राम रांकादादर में रहने वाले 19 वर्षीय गंगाराम कमार को बचपन से पेट मे दर्द की शिकायत थी, जो उम्र के साथ धीरे धीरे बढ़ती गई। विगत 03 साल पहले इलाज कराने के दौरान पेट मे ट्यूमर होने का पता चला। ट्यूमर के चलते गंगाराम का मल द्वार बंद हो गया था। परिजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने उसका इलाज प्राइवेट अस्पताल में करवाया। मगर गंगाराम का पूरी तरह इलाज नही हो सका। इसके बाद परिजनों ने दुबारा फिर प्राईवेट हॉस्पिटल में उसका ऑपरेशन करवाया और पेट के रास्ते पाइप निकाल कर मल द्वार निकाला है।

इसी पाइप के सहारे पिछले 3 साल से गंगाराम मल, मूत्र त्याग कर रहा है। कुछ समय पहले पिता का साया भी उसके सर से उठ चुका है वर्तमान में वो अपने बड़े भाई के पास रह रहा है। गंगाराम पिछले 3 सालो से इसी स्थिति में जिंदगी जीने को मजबूर है। इस बीमारी और हालात के चलते गंगाराम की पढ़ाई भी छूट चुकी है, वही इस बारे में कमार परियोजना के सहायक आयुक्त ने बताया कि कमार परियोजना के तहत दो साल पहले उसे इलाज के लिए दो बार मे 1 लाख 77 हजार रुपये की राशि दी गई है। परंतु गंगाराम के भाई ने केवल 40 हजार रुपये मिलने की बात कही है।

गंगाराम के परिजन अब उसकी दर्द भरी जिंदगी से निजात दिलाने शासन प्रशासन से उसके इलाज की गुहार लगा रहे है। इधर मीडिया के पहुँचने की जानकारी लगने के बाद गंगाराम के घर आनन फानन में 108 भेजकर उसे जिला अस्पताल लाया गया। जंहा डॉक्टर उसकी जांच पड़ताल कर रहे है और जल्द उसका इलाज करने की बात कह रहे है।

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