सदियों से अज्ञात गांवों की पहचान, अबूझमाड़ के 497 गांवों में होगा सर्वे
A survey will be conducted in 497 villages of Abujhmad, villages unknown for centuries have been identified.

रायपुर। बस्तर संभाग के 497 गांवों में मई से राजस्व सर्वे शुरू होगा। अबूझमाड़ सहित बस्तर के इन गांवों में सरकार पहली बार आधिकारिक रूप से कदम रखने जा रही है। राजस्व सर्वे होने से सदियों से गुमनाम रहे इलाके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होंगे।
सर्वे के लिए आईआईटी रुड़की को जिम्मेदारी दी गई है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के 240 गांव आज तक किसी भी सरकारी सर्वे की श्रेणी में नहीं थे।
ना कभी पटवारी पहुंचे और ना कोई सरकारी सर्वेक्षक
माओवादियों के डर के कारण इन गांवों में ना तो कभी पटवारी पहुंचे और ना ही कोई सरकारी सर्वेक्षक, लेकिन अब बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर और दंतेवाड़ा जैसे जिलों के सैकड़ों गांवों का नक्शा तैयार होगा।
अबूझमाड़ के 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र के मानचित्रण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-रुड़की) के साथ इसी साल जनवरी में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
विज्ञानी तरीके से होगा सर्वे
अबूझमाड़, जिसे दशकों तक माओवाद के साये और दुर्गम रास्तों के कारण अबूझ (अनसुलझा) माना जाता था, अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहा है। सर्वे केवल जमीन नापने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि जल, जंगल, नदी, तालाब और खेतों का विज्ञानी तरीके से रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
सर्वे के बाद किसान एमएसपी पर बेच सकेंगे धान
हैबिटेशन मैपिंग के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि वास्तविक तौर पर किस ग्रामीण के पास कितनी जमीन है और वहां की आबादी कितनी है। सरकारी रिकॉर्ड में नहीं होने के कारण अबूझमाड़ इलाके के किसान अपना धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाते थे। सर्वे के बाद वे फसल का उचित मूल्य और बोनस प्राप्त कर सकेंगे।
सर्वे का क्या होगा लाभ
जमीन का मालिकाना हक मिलेग सदियों से अपनी जमीन पर रहने वाले ग्रामीणों को भूमि का पट्टा और मालिकाना हक मिलेगा। राजस्व ग्राम घोषित होने के बाद महतारी वंदन, नल-जल योजना और किसान ऋण जैसी सुविधाएं सीधे उन तक पहुंच सकेंगी।
बस्तर क्षेत्र में राजस्व सर्वे हमारे आदिवासी भाई-बहनों के अधिकारों को मजबूत करने की ऐतिहासिक पहल है। इससे हर परिवार को अपनी जमीन का वैध दस्तावेज मिलेगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी सुविधाएं अब तेजी से पहुंच पाएंगी।
-वनमंत्री केदार कश्यप



