भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप, जो अपने सुव्यवस्थित प्रबंधन और अनुशासित औद्योगिक संस्कृति के लिए पहचानी जाती है, उसके समानांतर एक ऐसी चुनौती भी मौजूद है जो संयंत्र की सीमाओं से बाहर, सीधे आम जनजीवन से जुड़ी है—रात्रिकालीन सड़क सुरक्षा। विशेष रूप से सड़कों पर बैठे या विचरण करते आवारा मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाएँ एक गंभीर चिंता के रूप में उभरती रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे में ये पशु अंतिम क्षण तक दिखाई नहीं देते और कई बार दुर्घटनाएँ टालना संभव नहीं रह जाता।
यह स्थिति केवल एक सामान्य समस्या नहीं, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार के लिए संवेदनात्मक अनुभव भी रही है। समय-समय पर कई कर्मी इस प्रकार की दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं, वहीं एक अत्यंत दुखद घटना में पीबीएस विभाग से जुड़े एक संविदा कर्मी के पुत्र की असामयिक मृत्यु ने इस विषय की गंभीरता को गहराई से उजागर किया।
इसी पृष्ठभूमि में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के पीबीएस विभाग में इंजीनियरिंग एसोसिएट के रूप में कार्यरत श्री मोहम्मद रफ़ी ने एक सरल किन्तु प्रभावी पहल की शुरुआत की। सितंबर 2025 से प्रारंभ इस अभियान के अंतर्गत टाउनशिप में घूमने वाले मवेशियों—विशेषकर गाय और बैलों को रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाए जा रहे हैं। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही ये बेल्ट दूर से चमकते हैं और चालक को समय रहते सतर्क कर देते हैं। एक छोटे से उपाय के माध्यम से बड़े जोखिम को कम करने का यह प्रयास संवेदनशीलता का परिचायक है।
इस पहल का क्रियान्वयन भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। मवेशियों को सुरक्षित ढंग से नियंत्रित करने के लिए श्री मोहम्मद रफ़ी द्वारा ब्रेड या हरी सब्जियों का सहारा लिया जाता है, ताकि बिना किसी आक्रामकता के उन्हें बेल्ट पहनाया जा सके। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों द्वारा इन बेल्टों को हटाने की घटनाएँ सामने आई हैं, जो इस अभियान की गति को प्रभावित करती हैं। फिर भी यह प्रयास निरंतर जारी है।
अब तक 102 से अधिक मवेशियों को रिफ्लेक्टिव बेल्ट से चिह्नित किया जा चुका है। यह संख्या भले ही समस्या के व्यापक स्वरूप की तुलना में सीमित लगे, किंतु यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि समाधान की दिशा छोटे कदमों से ही प्रारंभ होती है।
श्री मोहम्मद रफ़ी की यह पहल केवल एक सुरक्षा उपाय नहीं, बल्कि सामुदायिक चेतना का प्रतीक है। यह दर्शाती है कि जब व्यक्ति अपने दायरे से आगे बढ़कर समाज के लिए सोचते हैं, तब बदलाव की एक नई दिशा बनती है—जहाँ सुरक्षा केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी बन जाती है।
अंधेरी सड़कों पर जिम्मेदारी की रोशनी: भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मी मोहम्मद रफ़ी की पहल से उभरता सामुदायिक सरोकार
A Light of Responsibility on Dark Streets: Community Concerns Emerge Through the Initiative of Bhilai Steel Plant Worker Mohammad Rafi
