रिपोर्टर : लोकेश्वर सिन्हा
गरियांबद। छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम में शुरू हुए कुंभ कल्प में तरह–तरह के दुकान सजे हैं, दूर–दराज से यहां मेले में दुकान लगाने लोग पहुंचे हुए हैं। इस मेले में आज भी छत्तीसगढ़ की परंपरा की झलक बखूबी देखी जा सकती है।
बताते चले कि राजिम कुंभ कल्प मेला में जगह–जगह छत्तीसगढ़ी व्यंजन की दुकानें लगी हुई है, जिसमें खाजा, लाई, जलेबी, पेठा, रखिया पाक, मुर्रा लड्डू , तिल लड्डू बिकने को आई हैं. लेकिन इसके अलावा खासकर इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली ‘उखरा’ आज भी राजिम मेला की शोभा बढ़ा रही है, जिसे एक तरह से प्रसाद व मीठे के रूप में जाना जाता है, मेला स्थल सहित संगम स्थल में लगी दुकानों में आसानी से देखा जा सकता है ये ‘उखरा’ जो कि पूर्व के समय में इसकी पूछपरख और अंचल में होने वाले मड़ाई–मेला में काफी थी, लेकिन आज वर्तमान समय में अब कम हो गई है, इसके बावजूद भी ‘उखरा’ की महत्ता जानने वाले लोग मेले में पहुंचकर इसे खरीद रहे हैं, जबकि एक समय अपने जमाने मे इस मिठाई का प्रचलन बहुत था. तो वहीं पूर्वज के समय से ‘उखरा’ का व्यवसाय करने वाले लोग आज भी मेले में इसके दुकान लगाए हुए हैं, मेले में ‘उखरा’ के महत्व को लेकर हमारे संवाददाता लोकेश्वर सिन्हा ने लोगों से बातचीत की है।
