गरियाबंद में पेड़ों को बचाने की अनूठी पहल, देश में पहली बार बड़े पैमाने पर गर्डलिंग से प्रभावित 3500 पेड़ों का इलाज
A unique initiative to save trees in Gariaband: for the first time in the country, 3,500 trees affected by 'girdling' are being treated on a large scale.
लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद
गरियाबंद देश मे पहली बार बृहद स्तर पर गर्डलिंग किये गए पेड़ो का किया जा रहा ट्रीटमेंट । डॉक्टर ट्री के नाम से मशहूर कर्नाटक से आये विजय निशांत नेचुरल तरीक़े से पेड़ो का कर रहे इलाज । गरियाबंद जिले के उदंति सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगलों में ग्रामीणों द्वारा वन पट्टा के लालच मे खेत बनाने के लिये हजारों पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है। पेड़ों के तनों को चारों तरफ से काट दिया गया, जिससे उनके सूखने का खतरा बढ़ गया है। अब इन पेड़ों को बचाने के लिए कर्नाटक से पहुंचे हैं ट्री डॉक्टर विजय निशांत, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग के साथ मिलकर वे पेड़ों का इलाज कर रहे हैं। साथ ही वनकर्मियों को भी इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है।
ये हैं गरियाबंद के करका गाँव उसके जंगल के वो पेड़, जिन्हें बचाने के लिए अब इलाज किया जा रहा है। पेड़ों के तनों को चारों तरफ से गहराई तक काट दिया गया है। इस तरीके को गर्डलिंग कहते हैं। इससे पेड़ों में पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है और धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगते हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व वन विभाग के उपनिदेशक वरुण जैन के मुताबिक, करका क्षेत्र में ऐसे करीब 35 सौ पेड़ों की पहचान की गई है। वहीं, सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पिछले एक दशक में इस इलाके में सवा लाख से ज्यादा पेड़ों के नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। वन पट्टे का लाभ लेने के लिए जमीन पर कब्जे की कोशिशों के दौरान पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका भी जताई गई है।
अब इन पेड़ों को बचाने की जिम्मेदारी उठाई है कर्नाटक से आए विजय निशांत ने पेड़ों के संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले विजय को ट्री डॉक्टर के नाम से जाना जाता है। पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र से जुड़ी देश की कई संस्थाओं और प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उनके कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया है वे पेड़ों की हालत देखकर उनका इलाज करते हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की गर्डलिंग उन्होंने अपने करियर में पहली बार देखी है यह देखना दुखद है। वे पूरी कोशिश करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ों को बचाया जा सके।
इस अभियान में वन विभाग के 50 से ज्यादा कर्मचारियों को भी पेड़ों के इलाज का तरीका सिखाया जा रहा है। ताकि विजय निशांत के लौटने के बाद भी वनकर्मी इन पेड़ों की देखभाल कर सकें। लेकिन हर पेड़ को बचा पाना आसान नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पेड़ को कितना नुकसान पहुंचा है और उसका इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ है



