छत्तीसगढ़

चक्रधर समारोह में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने हास्य-व्यंग्य से खूब गुदगुदाया

Padma Shri Surendra Sharma delighted the audience with his humor and satire at the Chakradhar Samaroh.

40 वर्षों की साहित्यिक यात्रा के अनुभवों से सजी प्रस्तुति, अन्य कवियों ने भी गीत, वीर रस और व्यंग्य से बांधा समां

रायपुर । 41 वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में शनिवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का मुख्य आकर्षण पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा रहे। अपनी विशिष्ट हास्य-व्यंग्य शैली के लिए देशभर में प्रसिद्ध श्री शर्मा ने जीवन, समाज और बदलते परिवेश पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक खूब गुदगुदाया। उनकी सहज और चुटीली प्रस्तुति पर रामलीला मैदान में लगातार ठहाके और तालियां गूंजती रहीं।

करीब 40 वर्षों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हास्य के साथ जीवन के गहरे संदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कितनी भी ताकत और ऊंचाई हासिल कर लें, अकड़ना नहीं चाहिए। उनकी प्रस्तुतियों में हास्य के साथ सामाजिक सरोकार और जीवन के अनुभवों की झलक दिखाई दी। देश की मिट्टी और भारतीय संस्कृति की खुशबू को देश-विदेश तक पहुंचाने वाले श्री शर्मा की प्रस्तुति का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। हास्य कवयित्री श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे ने बेटियों के महत्व और महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बेटियां सुख-दुख में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हंसी निर्मल, निष्पक्ष और निर्दाेष होनी चाहिए। अपनी हास्य-व्यंग्य प्रस्तुतियों से उन्होंने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत वीर रस की कवयित्री श्रीमती कविता तिवारी ने मां सरस्वती की वंदना से की। उन्होंने युवाओं और बेटियों को लेकर ओजपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत करते हुए नारी सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश दिया। “कोख में न मारो, बापू बेटी है तुम्हारी” जैसे भावों से सजी उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को भावुक किया। गांधारी पर आधारित उनकी कविता ने भी खूब प्रभाव छोड़ा। गीतकार किशोर तिवारी ने “नया सूरज के नवा अंजोर”, “हरिहर धनिया” और “राम-राम बबा जोहार बूढ़ी दाई” जैसे गीतों से छत्तीसगढ़ी माटी और लोकजीवन की खुशबू बिखेरी। वहीं डॉ. प्रवीण शुक्ला ने अपने चिर-परिचित हास्य अंदाज में सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य करते हुए श्रोताओं को खूब हंसाया। 36 वर्षों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय डॉ. शुक्ला की 27 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उज्जैन के हास्य कवि डॉ. दिनेश दिग्गज ने भी अपनी व्यंग्य रचनाओं से माहौल में हास्य का रंग घोला। वहीं गीतकार अमन अक्षर ने सुंदर और भावपूर्ण गीतों से कवि सम्मेलन की शाम को सुरमय बनाया। विभिन्न रसों और शैलियों से सजी प्रस्तुतियों ने छठवीं सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

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