छत्तीसगढ़

CG हाईकोर्ट का फैसला, कम उम्र में जीता चुनाव हुआ रद्द

CG High Court verdict: Election won at a young age set aside.

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत इलेक्शन में उम्र को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज बर्थ डेट को उम्र का फाइनल प्रूफ नहीं माना जा सकता। एजुकेशनल रिकॉर्ड और 10वीं की मार्कशीट ही ज्यादा भरोसेमंद है।

क्या है पूरा मामला

मामला ग्राम पंचायत कृष्णानगर, जनपद पंचायत बलरामपुर का है। यहां की सरपंच जसिला तिथियो की बर्थ डेट क्लास पहली से लेकर मैट्रिक तक के डॉक्यूमेंट में 12 अप्रैल 2004 दर्ज है। इस हिसाब से पंचायत चुनाव में नॉमिनेशन के टाइम उनकी उम्र 21 साल पूरी नहीं हुई थी।

याचिकाकर्ता जसिला तिथियो, पत्नी रंजीत दास, उम्र करीब 23 साल, वार्ड नंबर 10, ग्राम कृष्णानगर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज की रहने वाली हैं। उन्होंने सरपंच पोस्ट के लिए नॉमिनेशन फाइल किया था, जिसे रिटर्निंग ऑफिसर ने एक्सेप्ट कर लिया था। इलेक्शन में कुल तीन कैंडिडेट थे और 22 फरवरी 2025 को हुई वोटिंग में जसिला को सबसे ज्यादा वैलिड वोट मिले थे।

प्रतिद्वंद्वी ने लगाई थी याचिका

दूसरी कैंडिडेट सूरजपती राम ने इलेक्शन पिटीशन फाइल की। आरोप लगाया कि जसिला की असली बर्थ डेट 12 अप्रैल 2004 है और नॉमिनेशन के टाइम वह सिर्फ 19 साल की थीं। इलेक्शन ट्रिब्यूनल ने 25 सितंबर 2025 को पिटीशन एक्सेप्ट करते हुए जसिला का इलेक्शन शून्य घोषित कर दिया था।

बाद में अपडेट कराया बर्थ सर्टिफिकेट

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जसिला ने 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया हुआ बर्थ सर्टिफिकेट पेश किया, जिसमें बर्थ डेट 12 अप्रैल 2002 लिखी थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि ये सर्टिफिकेट इलेक्शन पिटीशन फाइल होने के बाद जारी हुआ है।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 7 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि बर्थ डेट तय करने में बर्थ सर्टिफिकेट, मान्यता प्राप्त बोर्ड का मैट्रिक सर्टिफिकेट और स्कूल रिकॉर्ड ही इम्पॉर्टेंट हैं। संविधान के आर्टिकल 243-एफ के मुताबिक पंचायत इलेक्शन लड़ने के लिए 21 साल की एज पूरी करना जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के ऑर्डर को बरकरार रखा और रिट याचिका खारिज कर दी।

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