अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ HC का बड़ा फैसला, कम वेतन बाधा नहीं
Chhattisgarh HC's major ruling on compassionate appointment: Low salary is no bar.

बिलासपुर: हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि परिवार के किसी सदस्य के कम वेतन वाले पद पर कार्यरत होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति और मृत कर्मचारी के स्थान पर आश्रित को नियुक्ति देने के उद्देश्य को भी ध्यान में रखना होगा।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने दुर्ग जिले के धामधा निवासी विजय कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर पंचायत धामधा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 14 सितंबर 2022 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया। इस आदेश से याचिकाकर्ता की अनुकंपा नियुक्ति की मांग इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि उसके पिता सफाई कामगार के पद पर कार्यरत हैं।
याचिकाकर्ता विजय कुमार की मां दुकलहिन बाई नगर पंचायत में स्वीपर के पद पर कार्यरत थीं। 25 फरवरी 2022 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद विजय ने अन्य आश्रितों की सहमति के साथ अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। नगर पंचायत ने 23 फरवरी 2019 की अनुकंपा नियुक्ति नीति की धारा 6(ए) का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें याचिकाकर्ता के पिता को अच्छा वेतन प्राप्त होता हो। पिता सफाई कामगार के रूप में कम वेतन वाले पद पर कार्यरत हैं। केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि परिवार आर्थिक संकट से बाहर आ गया है।
कोर्ट ने 12 मई 2026 के डिवीजन बेंच के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि परिवार के एक सदस्य के कम वेतन वाली नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य विफल नहीं होना चाहिए।
हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया कि विजय कुमार के दावे पर दोबारा विचार किया जाए। यह प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।



