SGH की अव्यवस्थाओं और निजी अस्पतालों की मनमानी पर कार्रवाई की मांग
Demand for action against the mismanagement at SGH and the arbitrary practices of private hospitals.

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
प्रसूता-नवजात मौत समेत लापरवाही के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग; एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो सत्याग्रह और आंदोलन की चेतावनी.

संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सहित जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर रविवार को राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन रीवा संभाग आयुक्त को सौंपा गया। ज्ञापन में अस्पतालों की कथित अव्यवस्थाओं और निजी अस्पतालों की मनमानी पर कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन देने वालों ने संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता एवं नवजात की मृत्यु से जुड़े मामले में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही ड्यूटी डॉक्टर, एनेस्थीसिया विभाग और संबंधित स्टाफ की जिम्मेदारी तय कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में कल्पना मिश्रा की मृत्यु के मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है।
फीस सार्वजनिक करने और सीसीटीवी निगरानी की मांग
ज्ञापन में सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई। विभिन्न जांचों और उपचार की फीस जिला प्रशासन की वेबसाइट और अस्पतालों के सूचना पटल पर सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई है।
इसके अलावा अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने और फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई। एक्सपायरी दवाओं के कथित उपयोग, लिफ्ट और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं में लापरवाही तथा स्ट्रेचर व अन्य सेवाओं के नाम पर कथित अवैध वसूली की नियमित निगरानी कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो रीवा जिले के नागरिक और समाजसेवी शांतिपूर्ण सत्याग्रह एवं आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में गिरिजेश कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता बी.के. माला, जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी, अमित सोहगौरा, शैलेश पाण्डेय, अमरदीप द्विवेदी, नरेन्द्र सिंह, अमरेन्द्र मिश्रा और विकास दुबे सहित अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य नागरिक शामिल रहे।



