छत्तीसगढ़

अंतिम निर्णय से पहले ही डीईओ पर आरोपों की बौछार, क्या बदनाम करने की हो रही कोशिश?

Barrage of allegations against the DEO even before the final decision—is there an attempt to tarnish his reputation?

दस्तावेजों में ऑनलाइन प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण का दावा

बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी) जिला शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध शैक्षणिक मदों की खरीदी में करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों को लेकर इन दिनों चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से विभिन्न सामग्रियों की खरीदी, आपूर्ति, वितरण, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में की गई विभिन्न खरीदारियां ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से नियमानुसार किए जाने का दावा किया गया है।

 

जानकारी के मुताबिक साइकिलों की खरीदी संचालक लोक शिक्षण संचालनालय स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से हुई है। खरीदी गई साइकिलें संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गईं, फिर गठित समिति के द्वारा उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किया गया, जिसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा उन्हें संबंधित स्कूलों में पहुंचाया गया। विद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से साइकिलों का वितरण कराया गया।

 

इसी तरह फर्नीचर की आपूर्ति भी संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं में कराई गई। सामग्री पहुंचने के बाद संस्थाओं से उसकी पावती प्राप्त की गई। साथ ही उपलब्ध फर्नीचर का गुणवत्ता परीक्षण भी कराया गया। गुणवत्ता एवं आपूर्ति संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित फर्मों को ट्रेजरी के माध्यम से नियमानुसार भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है।

 

साइंस किट की खरीदी भी राज्य स्तर से डायरेक्टरेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत की गई। संबंधित फर्म द्वारा संस्थानों में साइंस किट की आपूर्ति की गई, जिसकी प्राप्ति संबंधी पावती उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके बाद टीम के माध्यम से सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण एवं फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित सामग्री का भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से किए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

वहीं स्वच्छता सामग्री की खरीदी भी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। सप्लायर द्वारा संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्टॉक में सामग्री की एंट्री कर उसे संबंधित स्कूलों में वितरित कराया गया। वितरण एवं स्टॉक संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार संबंधित फर्म को भुगतान किया गया।

 

4.51 करोड़ के भुगतान पर डीईओ ने रखा अपना पक्ष

 

जब इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से बात कि गई तो उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में किए गए क्रय के भुगतान की कुल राशि 45,166,159 रुपये को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। विज्ञप्ति के अनुसार, जांच दल द्वारा इस राशि को कथित रूप से शासकीय राशि के गबन से जोड़कर बताया जा रहा है। डीईओ ने कहा है कि जांच दल द्वारा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के तत्काल बाद यह मामला सोशल मीडिया में वायरल हुआ तथा सोशल मीडिया न्यूज एवं समाचार पत्रों में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गबन किए जाने संबंधी खबरें सामने आईं।

 

डीईओ के अनुसार, इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से चर्चा करने पर यह तथ्य सामने आता है कि शासकीय भुगतान जिला कोषालय अधिकारी द्वारा परीक्षण करने के पश्चात ही किया जाता है। उन्होंने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया है कि जांच दल में एक सदस्य जिला कोषालय अधिकारी हैं। उनका कहना है कि ऐसे में शासकीय राशि के गलत भुगतान के मामले में कोषालय की भूमिका भी जांच का विषय होनी चाहिए।

 

जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अधिकांश सामग्रियों का क्रय आदेश शासन स्तर से स्वीकृत किया गया था। उनके अनुसार सामग्री प्राप्त होने के बाद उसकी पावती, भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के पश्चात नियमानुसार भुगतान हेतु देयक जिला कोषालय कार्यालय बलरामपुर को प्रेषित किए गए थे। उन्होंने कहा कि जिला कोषालय द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के छोटे-छोटे स्वत्वों के भुगतान में भी कई बार आपत्तियां लगाई जाती हैं, ऐसे में इतनी बड़ी शासकीय राशि के भुगतान में कोषालय द्वारा निश्चित रूप से परीक्षण किया गया होगा।

 

डीईओ ने यह भी कहा है कि जांच दल द्वारा उनके ऊपर लगाए गए आरोपों का समाधानकारक उत्तर कलेक्टर के समक्ष शीघ्र ही अभिलेखों सहित प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा जांच दल को अपने कार्यालय में क्रय से संबंधित समस्त नस्तियां मूल रूप में सौंप दी गई थीं। इसके बावजूद जांच दल द्वारा राशि का गबन उनके द्वारा किया जाना प्रतिवेदित किया गया है, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जांच दल के दोनों अधिकारी वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अधिकारी हैं और मामले के वास्तविक तथ्यों की जानकारी उनके द्वारा ही स्पष्ट की जा सकती है।

 

बताया गया है कि साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री सहित विभिन्न मदों में की गई खरीदी में ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई तथा सामग्री की आपूर्ति, पावती, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई। ऐसे में खरीदी को लेकर सामने आ रहे आरोपों की वास्तविकता अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट का भी दावा

 

इधर, विभागीय जानकारों का दावा है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले की शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, नियमित मॉनिटरिंग और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक निगरानी बढ़ने के बाद शिक्षकों के समय पर विद्यालय पहुंचने की व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिला है।

 

विभागीय जानकारों के मुताबिक, पूर्व में छोटे-छोटे कार्यों के लिए लोगों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब कई मामलों में लोग सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं और उनका समाधान भी हो रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक सीमित होने की बात सामने आ रही है। जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से कुछ लोगों में नाराजगी हो सकती है, जिसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी की छवि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

 

फिलहाल अभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष सामने आने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।

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