छत्तीसगढ़

सौतेली बेटी से दरिंदगी, हाईकोर्ट सख्त

High Court takes a stern view of the brutal assault on a stepdaughter.

बिलासपुर। भिलाई के सुपेला थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले पिता की याचिका छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को सजा के लिए पर्याप्त मानते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। घटना 31 जुलाई 2024 को दुर्ग के सुपेला थाना क्षेत्र में हुई।

कोर्ट ने पिछले साल सुनाई थी 20 साल की सजा

यहां रहने वाली 13 वर्षीय नाबालिग की मां काम पर गई थी। आरोपित ने घर में सो रही अपनी 13 वर्षीय सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने चिल्लाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। घटना की जानकारी पीड़िता की छोटी बहन ने मां को दी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। दुर्ग स्थित चतुर्थ एफटीएससी विशेष कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2025 को आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी।

आरोपी ने फैसले को दी थी चुनौती

आरोपी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की थी। अपीलार्थी के वकील ने पीड़िता के बयानों में अंतर्विरोध और चिकित्सा साक्ष्यों की कमी का हवाला दिया। हालांकि, राज्य के अधिवक्ता ने फारेंसिक रिपोर्ट में मानव शुक्राणु के साक्ष्य प्रस्तुत किए। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही को महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अब आरोपी को अपनी पूरी सजा काटनी होगी।

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