
बिलासपुर। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर नौ लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। कोटा पुलिस ने एक शिक्षक दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि दंपती ने शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर शिकायतकर्ता से बड़ी रकम वसूल ली, लेकिन न तो नियुक्ति कराई और न ही पैसे लौटाए।
कोटा क्षेत्र के ग्राम नेवरा निवासी बिहारी सिंह टोडर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार उनकी पहचान जगदलपुर के धरमपुरा नंबर-1 निवासी खीर सिंधु हरपाल और उनकी पत्नी रेखा हरपाल से थी। दोनों पेशे से शिक्षक हैं। आरोप है कि दंपती ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक अपनी पहुंच होने का दावा करते हुए शिकायतकर्ता के छोटे भाई को सहायक ग्रेड-3 की सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था।
नौकरी लगवाने के नाम पर मांगे 10 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपियों ने नौकरी लगवाने के बदले 10 लाख रुपये की मांग की थी। साथ ही चार माह के भीतर नियुक्ति दिलाने का भरोसा भी दिया गया था। भरोसे में आकर शिकायतकर्ता ने जुलाई 2024 से नवंबर 2024 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल नौ लाख रुपये आरोपित दंपती को दिए।
पीड़ित ने बताया कि रकम जुटाने के लिए उन्हें रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा और ब्याज पर भी पैसे लेने पड़े। शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि तय समय के भीतर उनके भाई को नौकरी मिल जाएगी, लेकिन समय गुजरने के बाद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई।
बैंक ट्रांसफर और नकद में दिए गए रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार रकम अलग-अलग तारीखों में दी गई थी। आठ जुलाई 2024 को एक लाख रुपये और 12 सितंबर 2024 को दो लाख रुपये आरोपित के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा 11 जुलाई 2024 को ग्राम नेवरा स्थित घर में तीन लाख रुपये नकद दिए गए थे।
बाद में 24 नवंबर 2024 को जगदलपुर स्थित आरोपित के निवास पर जाकर तीन लाख रुपये और दिए गए। इस तरह कुल नौ लाख रुपये आरोपित दंपती को सौंपे गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि नकद लेनदेन के दौरान गवाह भी मौजूद थे।
22 महीने बाद भी नहीं लौटाए पैसे
पीड़ित ने बताया कि लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद न तो नौकरी मिली और न ही रकम वापस की गई। जब उन्होंने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपित लगातार बहाने बनाकर टालमटोल करते रहे। लगभग 22 माह बीत जाने के बाद भी रकम नहीं लौटाई गई।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने 29 अप्रैल को अपने वकील के माध्यम से आरोपितों को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में 15 दिनों के भीतर पूरी राशि लौटाने की मांग की गई थी। हालांकि नोटिस मिलने के बाद भी आरोपितों ने कोई जवाब नहीं दिया।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत बैंक ट्रांजेक्शन की रसीद, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कोटा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे लेनदेन और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।



