छत्तीसगढ़

4 साल में दोगुनी हुई गजराजों की संख्या

The number of elephants has doubled in four years.

रायपुर । राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का बड़ा परिणाम सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2026 में करीब 450 हो गई है। हाथियों की बढ़ती आबादी को सरकार ने संरक्षण की बड़ी सफलता बताया है, लेकिन इसके साथ ही मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती भी बढ़ी है। इसी चुनौती से निपटने और हाथियों के वैज्ञानिक प्रबंधन की रणनीति तैयार करने के लिए राज्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन शुरू किया गया है।

आनलाइन किया संबोधित

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय से वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए।

समृद्ध जैव विविधता है कारण

मंत्री केदार कश्यप ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की समृद्ध जैव विविधता और वन संपदा के कारण हाथियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।

पांचों संभागों में हाथियों का विचरण

वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

वन मंत्री ने कहा कि जनभागीदारी, सतत निगरानी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन और संरक्षण का प्रशिक्षण

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरुण कुमार पाण्डेय समेत विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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