छत्तीसगढ़

सिस्टम से 16 साल तक लड़ता रहा पिता, बेटे की मौत मामले में कोर्ट ने दिलाया न्याय

A father fought the system for 16 years, and the court delivered justice in his son's death case.

रायपुर। रायपुर निवासी एक पिता ने अपने दिवंगत बेटे की बीमा राशि पाने के लिए 16 वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार न्याय हासिल किया। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को मृतक सौरभ सेलारका के परिवार को ब्याज सहित कुल 1 करोड़ 21 लाख 72 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के फैसले के बाद कंपनी ने पीड़ित परिवार के खाते में 98.46 लाख रुपये जमा भी करा दिए हैं।

2009 में खरीदी थी ड्रीम प्लान पॉलिसी

जानकारी के अनुसार, रायपुर निवासी सौरभ सेलारका ने वर्ष 2009 में बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से 48 लाख 92 हजार रुपये की ड्रीम प्लान पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी लेने के करीब आठ महीने बाद, 2 दिसंबर 2009 को हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। बेटे की मृत्यु के बाद परिवार ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया।

बीमा कंपनी ने 2010 में खारिज कर दिया था क्लेम

मार्च 2010 में बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि सौरभ ने पॉलिसी लेते समय हाई ब्लड प्रेशर और वर्टिगो जैसी बीमारियों की जानकारी छिपाई थी। इसके बाद सौरभ के पिता अरविंद सेलारका ने कंपनी के फैसले को चुनौती देते हुए कानूनी लड़ाई शुरू की।

जांचकर्ता ने फर्जी तरीके से हासिल किया मेडिकल सर्टिफिकेट

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में सुनवाई के दौरान मामले में बड़ा खुलासा हुआ। संबंधित डॉक्टर ने शपथ पत्र देकर बताया कि उन्होंने कभी सौरभ सेलारका का इलाज नहीं किया था। जांच में सामने आया कि बीमा कंपनी के जांचकर्ता ने खुद को सौरभ बताकर डॉक्टर से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त किया था। इसी आधार पर कंपनी ने क्लेम अस्वीकार किया था।

राज्य आयोग का फैसला पलटा

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा वर्ष 2014 में दिए गए फैसले को निरस्त करते हुए बीमा कंपनी को 4 मार्च 2010 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

 

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