छत्तीसगढ़

उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण हो रही भर्ती में देरी

Delay in recruitment due to indifference of Higher Education Department

रायपुर: राज्य के सरकारी कॉलेजों में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। प्रदेश के 335 शासकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की भारी कमी है, लेकिन विडंबना देखिए कि 595 प्रोफेसरों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पांच साल बाद भी अधर में लटकी है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और उच्च शिक्षा विभाग के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा हजारों छात्र और योग्य अभ्यर्थी भुगत रहे हैं।

भर्ती में देरी का मुख्य कारण उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता को माना जा रहा है। लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों द्वारा नियमों और तकनीकी विषयों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। सीजीपीएससी ने इन आपत्तियों के निराकरण के लिए विभाग से ‘टेक्निकल ओपेनियन’ मांगा है, जो महीनों से फाइलों में दबा है।

हालांकि, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने नवंबर में प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे, लेकिन विभाग की सुस्ती जस की तस बनी हुई है। अभी भी उच्च शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। कुल 1,533 अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन (डीवी) हुए छह माह से अधिक बीत चुके हैं, पर साक्षात्कार (इंटरव्यू) की तिथि का अता-पता नहीं है।
विवादों से नहीं उबर पा रहीं भर्तियां

2018 में डॉ. रमन सिंह सरकार के समय बनाए गए थे प्रोफेसरों की भर्ती के लिए नियम।
सितंबर 2021: पूर्ववर्ती सरकार ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया।
विवाद: शुरुआत में उम्र सीमा को लेकर हुए विवाद के कारण प्रक्रिया को रोकना पड़ा।
वर्ष 2024: विष्णु देव साय सरकार ने भर्ती में फिर से गति दी।
अधिकतम आयु 56 वर्ष और बाहरी राज्यों के लिए 45 वर्ष तय की गई।

शैक्षणिक सत्र पर संकट के बादल

कॉलेजों में प्रोफेसरों के पद खाली होने से न केवल शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। यदि समय रहते साक्षात्कार आयोजित नहीं किए गए, तो आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में भी छात्रों को बिना प्रोफेसरों के ही पढ़ाई करनी होगी।

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