छत्तीसगढ़

मार्च तक अनुज्ञा नहीं लिया तो होगी अवैध निर्माण पर कार्यवाही

If permission is not obtained by March, action will be taken against illegal construction.

देवीचरण ठाकुर

देवभोग_नगर पंचायत के अनुज्ञा बगैर निर्माण कर रहे मालिकों को तीन नोटिस के बाद अंतिम चेतावनी देने निकली पालिका प्रशाशन।सीएमओ बोले मार्च तक अनुज्ञा नहीं लिया तो होगी अवैध निर्माण पर कार्यवाही।
     बगैर भवन अनुज्ञा लिए बगैर निर्माण कर रहे भवन मालिकों को पालिका प्रशाशन अंतिम चेतावनी देनी निकली थी।सीएमओ दुष्यंत साहू अपने अमले के साथ हाइवे किनारे बड़े बड़े व्यवसाई कॉम्प्लेक्स निर्माण कर रहे भवन तक पहुंचे।जिन्हें पिछले 6 माह की अवधि में तीन नोटिस जारी किया जा चुका है इसे भवन स्वामी को निर्माण के वैध दस्तावेज अथवा अनुज्ञा लेने अन्तिम मार्च तक मियाद दिया गया है।सीएमओ ने कहा कि नगर पालिका अधिनियम 1961 की धाराओं के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग कर राजस्व विभाग के साथ मिल अवैध निर्माण पर कार्यवाही का अधिकार पालिका के पास सुरक्षित है।संबंधित सभी को मार्च 31 तक अनुज्ञा ले लेने अथवा आवेदन करने के लिए अपील किया गया है ।सीएमओ ने बताया कि कुल 18 निर्माण कार्य चल रहें हैं,जिसमें 8 भू स्वामियों ने निर्माण हेतु अनुज्ञा लिया हुआ है।नेशनल से लगे स्थानों में 5 निर्माण कार्य जारी है,विशाल काय व्यावसायिक कांप्लेक्स खड़े करने वालों ने अनुज्ञा नहीं लिया है,जबकि छोटे स्तर पर निर्माण करने वालों ने ले लिया है।संबंधित को तीन नोटिस जारी किया जा चुका है।
अनुज्ञा लेने के फायदे बताया सीएमओ ने_ समझाइश और चेतावनी देने निकले सीएमओ दुष्यंत साहू और उनकी टीम ने भवन अनुज्ञा लेने के फायदे बताते हुए कहा कि किसी भी कानूनी अड़चन अथवा कार्यवाही से बचने अनुज्ञा लिया जाना जरूरी तो है ही,इसके अलावा अनुज्ञा वाले भवन की प्रत्येक शासकीय योजनाओं में प्राथमिकता मिलती है।नल ,नाली और बिजली कनेक्शन लेने में अड़चनें नहीं आएंगी। संपत्ति विक्रय या फिर लोन हेतु गिरवी रखने में भी अनुज्ञा की आवश्यकता होती है।अवैध निर्माण के तुलना में वैध निर्माण संपत्ति का मोल तय सरकारी अथवा बाजार भाव से आंकलन होता है।
भू परिवर्तन बन रहा रोड़ा_ अनुज्ञा लेने से पहले कृषि भूमि को उद्देश्य के आधार पर परिवर्तन कराया जाना अनिवार्य है। डायवर्शन की प्रकिया को सरकार ने सरलीकरण किया है पर अफसरों के उदासीनता के चलते इसका फायदा नहीं मिल रहा है।आज भी 20 से ज्यादा डायवर्शन प्रकरण एसडीएम कार्यालय में लंबित हैं अथवा प्रकरण दर्ज कराने जरूरत मंद दफ्तर का चक्कर लगा रहा है।डायवर्शन की लिए मिशल की अनिवार्यता डायवर्शन के लिए बाधा बना हुआ है।प्रशासन को इसे सरलीकरण के लिए पहले करने की आवश्यकता है।

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