छत्तीसगढ़

तीर-धनुष लेकर विशेष पिछड़ी कमार जनजाति की पदयात्रा शुरू

The special backward Kamar tribe started their foot march with bows and arrows.

मैनपुर से रायपुर तक बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर निकले सैकड़ों ग्रामीण

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद।

गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक क्षेत्र से एक ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत हुई है। विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के सैकड़ों लोग तीर-धनुष और पारंपरिक वेशभूषा में सजकर रायपुर राजधानी की ओर पदयात्रा पर निकले हैं।

इन ग्रामीणों की यह पदयात्रा प्रशासन से वर्षों से लंबित मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को लेकर की जा रही है।

*मूलभूत सुविधाओं के लिए उठाई आवाज़*

कमार जनजाति के ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र के कई गांव आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं, जहां न तो नियमित बिजली आपूर्ति है, न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था और न ही पक्की सड़कें।

बरसात के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुँचाना एक चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन और मांगपत्र सौंपे गए, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

*राजधानी रायपुर तक पदयात्रा का फैसला*

निराश और उपेक्षित महसूस कर रहे कमार जनजाति के लोग अब अपनी आवाज़ सीधे राज्य के शीर्ष स्तर तक पहुँचाने के लिए मैनपुर से रायपुर तक लंबी पदयात्रा पर निकले हैं।

यह यात्रा लगभग 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करेगी और रास्ते में आने वाले गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं।

रायपुर पहुँचकर प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें सभी बुनियादी सुविधाओं को तत्काल बहाल करने और कमार जनजाति के लिए विशेष विकास पैकेज की मांग की जाएगी।

*पारंपरिक स्वरूप में शांतिपूर्ण यात्रा*

यह पदयात्रा अपने पारंपरिक स्वरूप में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

यात्रा में शामिल पुरुष और महिलाएँ पारंपरिक पोशाक में, हाथों में तीर-धनुष और जनजातीय झंडे लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

जनजातीय गीतों और नारों के बीच यह जत्था नेशनल हाइवे के गांव-गांव होकर रायपुर की ओर बढ़ रहा है।

*सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम*

प्रशासन ने इस पदयात्रा को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं।

पुलिस बल की बड़ी टुकड़ी यात्रा के साथ चल रही है ताकि किसी भी प्रकार की अवांछनीय स्थिति न बने।

स्थानीय थाना क्षेत्र के अधिकारी लगातार निगरानी में हैं और यात्रा मार्ग पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

*ग्रामीणों की पीड़ा “सरकार सिर्फ आश्वासन देती है”*

पदयात्रा में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से सरकार से केवल वादे सुनते आ रहे हैं। “हमारे गांवों में अब भी अंधेरा है। बच्चे बिना बिजली पढ़ नहीं सकते, सड़क न होने से स्कूल जाना मुश्किल है, बीमार को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी परेशानी है। अब हम रायपुर जाकर राज्यपाल से गुहार लगाएंगे,”

*प्रशासन की प्रतिक्रिया*

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं, और कुछ गांवों में बिजली व सड़क का काम प्रगति पर है।

हालांकि, पदयात्रा को लेकर प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखना लोकतांत्रिक अधिकार है, और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है।

*जनजातीय स्वाभिमान और विकास की पुकार*

कमार जनजाति की यह पदयात्रा केवल एक मांग नहीं, बल्कि विकास से वंचित समुदायों की आवाज़ बन चुकी है।

ग्रामीणों की उम्मीद है कि रायपुर पहुँचने पर उनकी समस्याओं पर राज्य सरकार और राज्यपाल दोनों संज्ञान लेंगे और जल्द ही समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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