छत्तीसगढ़

भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘रिगिंग एसेंशियल्स’ पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित 

Two-day training programme on 'Rigging Essentials' organised at Bhilai Steel Plant

सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा टाटा स्टील इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग (टीएसआईसी) के सहयोग से “रिगिंग एसेंशियल्स” विषय पर दो दिवसीय सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन विकास केंद्र में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयंत्र के विभिन्न विभागों से विशेषकर सामग्री प्रबंधन से जुड़े कुल 32 गैर-कार्यपालक कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री देबदत्त सत्पथी तथा महाप्रबंधक प्रभारी (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) श्री एस. के. अग्रवाल उपस्थित थे। तकनीकी सत्रों का संचालन टाटा स्टील इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग के संकाय श्री आनंद मोहन सिंह द्वारा किया गया। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन सहायक महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) श्री अजय टल्लू द्वारा किया गया।
मुख्य महाप्रबंधक श्री देबदत्त सत्पथी ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों के उत्साह और सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम संयंत्र में सुरक्षा संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे सुरक्षा के प्रति अपनी जागरूकता को और गहरा करें तथा कार्यस्थल पर सीखी गई बातों को व्यवहार में लाएँ ताकि संयंत्र में सुरक्षित और दक्ष संचालन सुनिश्चित हो सके।
महाप्रबंधक श्री एस. के. अग्रवाल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सुरक्षा ज्ञान और कौशल का सतत उन्नयन ही कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की रोकथाम और “जीरो हार्म कल्चर” को सशक्त बनाने की कुंजी है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने सहकर्मियों के साथ साझा करें ताकि सामूहिक रूप से सुरक्षा मानकों को और ऊँचा उठाया जा सके।
सत्र का संचालन कर रहे श्री आनंद मोहन सिंह ने रिगिंग की सुरक्षित प्रक्रियाओं, उपकरणों के सही उपयोग और मानकीकृत कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीएसपी जैसे एकीकृत इस्पात संयंत्र में सामग्री प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सुरक्षित रिगिंग प्रथाएँ उत्पादन में निरंतरता, उत्पादकता में वृद्धि तथा कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

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