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अमूस तिहार त्यौहार परम्परा व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, सांसद, कलेक्टर व समाज प्रमुखों ने कृषि यंत्रों की पूजा की

जगदलपुर। आसना स्थित बादल अकादमी में शनिवार को बस्तर की लोक पर्व अमूस तिहार प्रतीकात्मक ढंग से परम्परा व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर विजय दयाराम के. सहित विभिन्न समाज प्रमुखों और गायता-पुजारी एवं गणमान्य नागरिकों ने हल-कृषि यंत्रों की पारम्परिक रूप से पूजा-अर्चना की। इस मौके पर युवाओं तथा उपस्थित लोगों ने गेड़ी दौड़, हंडी दौड़, नारियल फेंक प्रतियोगिता में उत्साह के साथ भाग लिया।

इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप ने उपस्थित सभी लोगों को अमूस तिहार की बधाई देते हुए कहा कि बादल संस्था बस्तर की भाषा-बोली, कला, लोकगीत-संगीत, संस्कृति और परम्परा, विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन सहित उसे जीवन्त रखने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही है। हरेली त्यौहार को बस्तर में अमूस तिहार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृति को बनाने और बचाने के लिए लाखों ने बलिदान दिया है, आदिवासी समाज, संस्कृति परम्परा को संरक्षित करने में अमूल्य योगदान दिया है। हरेली क्षेत्र का पहला पर्व है इसमें हमारे जरूरी और कृषि से संबंद्ध औजारों का पूजा किया जाता है। आदिवासी समाज पहले से ही प्रकृति पूजक रहा है। आदिवासियों की पूजा विधान में प्रकृति को समर्पित और संरक्षित करने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य है। आधुनिक युग में समाज की जिम्मेदारी है कि पुरानी रीति-रिवाज, परम्परा को नई पीढ़ी को बताएं। रीति-रिवाज की जानकारी नहीं होने से संस्कृति विलुप्त होने की स्थिति निर्मित होगी।

कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अमूस तिहार की बधाई देते हुए कहा कि अमूस तिहार से ही बस्तर में विभिन्न पर्वों की परम्परा शुरुआत होती है। बादल अकादमी में बस्तर की सभी संस्कृति को सहेजने की कोशिश की जा रही है, साथ ही बस्तर की भतरी, धुरली, हल्बी, गोंडी बोली-भाषा में गीत, इनकी लिपि पर आधारित पुस्तकों का संकलन, क्षेत्र की प्रमुख तीज-त्यौहार की जानकारी का संकलन बादल संस्था में किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य संभाग के सभी जिलों के कला-संस्कृति को संरक्षण एवं संवर्धन करना है। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा संगीत की ऑनलाईन क्लास की शुरुआत किया जा रहा है। स्थानीय भाषा-बोली के महत्व को समझते हुए प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों को शुक्रवार के दिन एक घण्टे क्लास में स्थानीय बोली की प्रशिक्षण दिए जाने की कार्ययोजना है। इसके अलावा बस्तर के परम्परागत खेल विधाओं को संवारने के लिए बस्तर ओलंपिक करने का भी प्लान किया जा रहा है।

इस मौके पर लामकेर के गेड़ी नर्तक दल ने मनोहारी गेड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं गेड़ी दौड़, हंडी दौड़ के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद थे। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जीआर शोरी, बादल के प्रशासक आशुतोष ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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