ग्रामीणों ने बनाया लकड़ी से पुल, सफर हुआ आसान

रिपोर्टर : लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद। गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज ही 20 किलोमीटर दूर पीपरछेड़ी गाँव हैं। पीपरछेड़ी ग्राम पंचायत के जाने के मुख्य मार्ग से महज 3, 4 सौ मीटर की दूरी पर पीपरछेड़ी ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम भूजिया पारा जाने के रास्ते में वनविभाग द्वारा बनाया गया सालों पुराना पुल टूट गया है।
चूँकि पीपरछेड़ी, भुंजिया पारा, अमेठी, पोटिया और फुलकर्रा में रहने वाले लगभग 3 हजार लोगों को पीपरछेड़ी आने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। इस मार्ग पर बड़ी मुश्किल से दो पहिया वाहनों से ही आना जाना होता है। मगर बारिश में यह मार्ग भी बंद हो जाता है जिसके कारण पीपरछेड़ी में लगने वाले साप्ताहिक बाजार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों से इनका संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है। इस दौरान मिडिल और हाई स्कूल जाने वाले बच्चे स्कूल नही जा पाते है और ना ही इन दौरान गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल में आने वाले शिक्षक भी यहां आ नही पाते है। ग्रामीण किसी इमरजेंसी के दौरान 3 से 5 किलोमीटर के इस रास्ते के बदले 15 से 20 किलोमीटर का अधिक दूरी तय कर सफर करते है।
इसी समस्या को देखते हुए ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से यहां पुल बनाने की मांग की जा रही है। सरपंच से लेकर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से भी कई बार मांग कर डाली, मगर कोई सुनवाई नही होते देख सबने मिलकर अस्थाई तौर पर आवाजाही के लिए इस लकड़ी से बना पुल का निर्माण कर लिया है। ताकि खासकर स्कूल आने जाने वाले बच्चो की पढ़ाई में किसी तहर की कोई बाधा न आ पाए।
पीपरछेड़ी भुंजिया पारा के निवासी अक्षय भुंजिया ने बताया कि अस्थाई तौर पर हम लोगो ने भले इस लकड़ी के पुल का निर्माण कर लिया है मगर बारिश के दौरान दुर्घटना का खतरा हमेशा मंडराते रहेगा, क्योंकि बारिश की वजह से लकड़ियां गीली हो जाती है और उसमें फिसलन आने के चलते सायकल और दो पहिया वाहन के पुल से नीचे गिरने का खतरा ज्यादा हो जाता है और अधिक बारिश होने पर यह पुल भी पानी मे डूब जाएगा तो हमारे गांव के अलावा आस पास के गांव भी टापू बन जाते है। आज गरियाबंद एसडीएम, नायाब तहसीलदार और पटवारी यहाँ आये थे हमारी समस्या और परेशानी को देखकर गए है हमने उनसे भी मांग की है कि वे हमारी इस समस्या को समझे और जितनी जल्दी हो सके यहाँ स्थाई मार्ग और पुल का निर्माण करा दे।



