“रन फॉर हॉर्नबिल” ने जगाई वन्यजीव संरक्षण की अलख
*बनियाधस जलप्रपात से करीपगार जलप्रपात तक दौड़ी प्रकृति संरक्षण की मुहिम
*स्थानीय ग्रामीणों से लेकर वन अधिकारियों ने लिया हिस्सा*
*लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद*….
वन्यजीव सप्ताह 2026 के अवसर पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति जनजागरूकता का अनूठा संदेश देखने को मिला। मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण और स्थानीय समुदाय को इससे जोड़ने के उद्देश्य से “रन फॉर हॉर्नबिल” 10 किलोमीटर दौड़ का आयोजन किया गया। जंगल, पहाड़, झरनों और प्राकृतिक हरियाली के बीच आयोजित इस दौड़ में करीब 250 प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लेकर हॉर्नबिल संरक्षण का संदेश दिया।
दौड़ का आयोजन उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले ओंढ और अमलोर गांवों के आसपास किया गया। लगभग 2,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र मालाबार पाइड हॉर्नबिल के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाता है। यही वजह रही कि इस दौड़ को महज खेल आयोजन के बजाय वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जोड़कर आयोजित किया गया।
*बनियाधस से शुरू हुई दौड़, करीपगार में हुआ समापन*
“रन फॉर हॉर्नबिल” की शुरुआत प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे बनियाधस जलप्रपात से हुई। प्रतिभागियों ने पहाड़ी और वन क्षेत्र से गुजरते हुए करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय की और करीपगार जलप्रपात पहुंचकर दौड़ का समापन किया।
दौड़ के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। जंगल की पगडंडियों और प्राकृतिक वातावरण के बीच दौड़ते प्रतिभागियों ने हॉर्नबिल संरक्षण के साथ-साथ वन और वन्यजीवों को बचाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक (Field Director) गुरुनाथन एन. तथा वन विभाग के विशेष सचिव धम्मशील गणवीर सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा USTR की सभी 8 रेंजों से वनकर्मी एवं अधिकारी, स्थानीय ग्रामीण और अन्य प्रतिभागियों ने भी दौड़ में भाग लिया।
*हॉर्नबिल सिर्फ पक्षी नहीं, जंगल के पुनर्जीवन का प्रहरी*
कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि हॉर्नबिल केवल एक दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी ही नहीं, बल्कि जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मालाबार पाइड हॉर्नबिल फलों का सेवन करने के साथ उनके बीजों को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। इस तरह यह पक्षी प्राकृतिक वन पुनर्जीवन और जंगलों की जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इस प्रजाति की मौजूदगी और बढ़ती उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को हॉर्नबिल संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति और पक्षी पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
“हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” से जंगल में तैयार हो रहा प्राकृतिक भोजनालय
हॉर्नबिल संरक्षण को मजबूत करने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पहले से ही “Hornbill Restaurants” की अभिनव पहल शुरू की गई है। नाम भले ही रेस्टोरेंट का है, लेकिन यह कोई पारंपरिक भोजनालय नहीं है। इसके तहत जंगल में ऐसे स्थान विकसित किए जा रहे हैं, जहां हॉर्नबिल को वर्ष भर प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सके।
इसके लिए पीपल, बरगद और फाइकस प्रजाति सहित फलदार वृक्षों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन वृक्षों के समूह हॉर्नबिल सहित अन्य पक्षियों के लिए प्राकृतिक भोजन और आवास उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
*हॉर्नबिल सफारी से संरक्षण के साथ रोजगार की उम्मीद*
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में “Hornbill Safari” की पहल भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल हॉर्नबिल के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों को प्रकृति आधारित रोजगार से जोड़ना भी है।
ओंढ, अमलोर और अमामोरा जैसे गांवों को इस पहल से जोड़ने की योजना है। इससे एक ओर जहां स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हॉर्नबिल और उसके प्राकृतिक आवास के संरक्षण में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी बढ़ेगी।
*महिला और वेटरन वर्ग में भी दिखा उत्साह*
“रन फॉर हॉर्नबिल” में विभिन्न वर्गों के प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में वनरक्षक सुश्री परमेश्वरी, सुश्री ललिता, सुश्री रिंकी जोशी तथा ओंढ गांव की सुश्री टीकेश्वरी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता स्थान हासिल किए।
वहीं Veteran Category में भी प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ दौड़ लगाई। इस वर्ग में गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने पहला स्थान प्राप्त किया। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक गुरुनाथन एन. दूसरे और तौरेंगा रेंजर केजूराम कोरचे तीसरे स्थान पर रहे।
जनभागीदारी से ही सफल होगा वन्यजीव संरक्षण
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीवों और जंगलों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी बेहद जरूरी है। जब ग्रामीण स्वयं जंगल और वन्यजीवों को अपनी धरोहर समझकर उनके संरक्षण में आगे आएंगे, तभी संरक्षण की मुहिम को स्थायी सफलता मिलेगी।
*“रन फॉर हॉर्नबिल” ने इसी जनभागीदारी का संदेश दिया*
वनकर्मियों, अधिकारियों, ग्रामीणों और युवाओं ने एक साथ दौड़कर यह संदेश दिया कि जंगल बचेंगे तो वन्यजीव बचेंगे और वन्यजीव बचेंगे तो पर्यावरण का संतुलन कायम रहेगा।
*10 किलोमीटर की दौड़ बनी संरक्षण का संकल्प*
बनियाधस जलप्रपात से करीपगार जलप्रपात तक करीब 10 किलोमीटर की यह दौड़ भले ही दूरी के लिहाज से सीमित रही हो, लेकिन इसके पीछे छिपा संरक्षण का संदेश काफी व्यापक रहा। पहाड़ों और जंगलों के बीच दौड़ते प्रतिभागियों ने प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराया।
वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत आयोजित इस आयोजन ने हॉर्नबिल संरक्षण, जैव विविधता, प्रकृति पर्यटन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को एक मंच पर लाने का काम किया।
“प्रकृति के लिए दौड़ें, हॉर्नबिल बचाएं” के संदेश के साथ संपन्न हुई यह दौड़ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक यादगार पहल बन गई।
